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1. विदेशों (इंडोनेशिया, किर्गिस्तान, मलेशिया, चीन आदि) से हज़ारों की संख्या में गरीब लफंगे टाइप के मुसलमान दिल्ली में बुलाये गये।

2. वीसा अवधि समाप्त होने पर ये वापस नहीं गये बल्कि भारत के तमाम शहरों की मस्जिदों में छिप गये लगभग 900 अभी तक ढूँढे नहीं जा सके।

3. ये पूरे देश मे खपा दिये गये एक organised तरीके से।

4. अगर कोरोना न फैलता तो क्या इनको कोई ढूँढता ?

5. शायद इनके बारे में कोई सोचता भी नही, ढूँढने की तो बात दूर है।

6. असल में किसी को इनमे इतनी रुचि भी नहीं थी कि इनकी ऐसे गतिविधियों पर कोई ध्यान दे और सोचे कि ऐसी कोई जमात या मीटिंग भी होती है और उसका असल मकसद क्या है?

7. क्या इनका मकसद सिर्फ धार्मिक बातें या मीटिंग करना है ? अब यह एक सोचने का विषय बन गया है।

8. कोरोना के पहले इस देश में कितनी बार तब्लीगी जमात या किसी अन्य जमात में कितने विदेशी मुसलमान कितनी बार कब -कब बुलाये गये और उनमें से कितने वापस गये, किसी ने सोचा ?

9. और ये अपने आप को छिपा क्यों रहे हैं ? इनको छिपाने के लिये डॉक्टरों और पुलिस टीम पर पथराव लगभग सभी जगह हो रहा है , एक ही पैटर्न में organised तरीके से, क्योकि अगर पकड़े गये तो गिनती होगी, कागज चेक होंगे, deportation होगा।

10. एक और बात ध्यान देने की यह है कि इन इंडोनेशिया आदि से आये लोगों की मोरादाबाद, बरेली, इलाहाबाद, लखनऊ और देश के अन्य छोटे शहरों में इनकी क्या connection, जान- पहचान या रिश्तेदारी हो सकती है जबकि ये हिंदी भी बोलना नही जानते?

11. अगर आप इन इंडोनेशिया आदि से आये लोगों को ध्यान से देखें तो यह कोई बहुत अच्छी हैसियत के लोग भी नहीं दिखते।

12. अगर कोई विदेशी वीसा अवधि के बाद भी वापस नही जाता तो उसको 137 करोड़ जनसंख्या वाले देश मे ढूँढना बहुत मुश्किल होता है, खास तौर से अगर उसका उद्देश्य ही इस देश मे खपने का हो।

देश में deportation करने का process और उसकी कानूनी कार्यवाही बहुत लंबी और पेचीदगी भरी है।

13. deportation process और भी complicated हो जाता है अगर कोई ऐसा विदेशी भारत मे चार शादी करके 26 बच्चे पैदा कर ले तो उसके सभी परिवार को कानूनी अधिकार भी मिल जाते हैं, personal law की दुहाई भी दी जाती है।

14. स्थिति साफ होती जा रही है की धार्मिक मीटिंग के आड़ में क्या चल रहा है? *भारत में दारुल हरब से दारुल इस्लाम बनाना ही इनकी रणनीति है।*

15. और अगर ये सब किसी पुरानी सरकार के वोट बैंक को फायदा पहुँचाने के उद्देश्य की आड़ में organised तरीके से किया जा रहा हो तो मामला NIA द्वारा गंभीर जाँच पड़ताल का बनता है।

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